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विजयादशमी का पावन पर्व हमे कुछ याद कराता है । दशमुख के दहन की याद कराता है ॥ हम सदियों से जन्म मरण दिवस मनाते आए हैं । इस ही रूप में श्रधा के पुष्प चढाते आए हैं ॥ हरवर्ष ईद क्रिश्मस मनती है,गुरुनानक जयंती आती है । हर बच्चा अपनी वर्षगाँठ मनाता है। आज देश में देशद्रोही मक्कारों की वर्षगांठ मनाई जाती है। कल तक जो गबन के आरोपों में घिरे रहा करते थे । आज अगर गांधी भी इस भारत में वापिस आ जायें । त्रेतायुग ने दशानन के दस मुख दिखाए थे। रावण तो महाज्ञानी, पराक्रमी वेदपाठी, पोलत्सय था । आज कलयुग में भी रावण हैं। विजयदसमी की कल ही नही आज भी जरुरत है। आज (जनता) सीता (नेता) रावन की लंका में कैद हो गयी। विजय दसमी का पर्व नया संदेश लाता है। एक दिन तो हर बच्चा राम बनना चाहता है। इस ही लिए यह पावन पर्व आता है। आओ हम भी यह विजय पर्व मनाये। सीता को आजाद कराने की
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