Prathana
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे| त्वया हुन्दुभुमे सुखं वर्धितोहम| महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे| पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते||' प्रभो शक्तिमन हिन्दुराश्त्रन्ग्भुता इमे सादरं त्वं नमामो वयम| त्वदीयाय कार्याय बदधा कटीयं शुभामाशिशन देही तत्पूर्तये| अजय्यां च विशव्स्य देहीश शक्तिम सुशीलान्जगद ये ननम ब्रह्मवेत| श्रुतेंचेवायत कन्ताकाकीर्नामार्गम स्वयं स्विक्र्तानस सुगम्कार्मयेत| समुत्कर्ष निश्श्रेय ससेइकमुग्राम परम साधानानाम वीरम ब्र्ह्मवेत| तदंतास स्फुर्त्व्कशाया धेयानिष्ठ हृद्यान्त्प्रजा गर्तु तीव्रनिषम| विजेत्री चानस संहता कार्यशक्तिर
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्| परम्वैभावं ने तुमेतात स्वराष्ट्रं, समर्था भवत्वा शीशा ते भृशं| भारत माता की जय
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