मुस्लिमों को पैकेज देंगी मायावती

 
Jul 11, 01:39 pm

लखनऊ
। केंद्र की संप्रग सरकार के अमेरिका के साथ एटमी करार पर आगे बढ़ने के
फैसले के मद्देनजर उत्तरप्रदेश की बसपा सरकार मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने
के लिए एक पैकेज का ऐलान कर सकती है।

बसपा मुखिया और प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती पहले ही एटमी करार को
मुस्लिम विरोधी और राष्ट्रविरोधी बताते हुए इसकी खिलाफत कर चुकी हैं और अब
वह आगामी लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने की पुरजोर कोशिश
में जुटी हुई हैं। मायावती द्वारा किए जा रहे प्रयासों से मुसलमानों में
व्यापक आधार वाली कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सरीखी पार्टियों में हड़कंप
मच गया है और इन दलों ने अपने मुस्लिम वोट बैंक को बचाने की कोशिश शुरू कर
दी है।

मुसलमानों को अपने खेमे में लाने की कोशिशों के तहत उत्तरप्रदेश सरकार
पिछले दस दिनों में शिया और सुन्नी धर्मगुरुओं के कई प्रतिनिधिमंडलों से
मुलाकात कर चुकी है और जल्द ही उर्दू अकादमी को दी जाने वाली राशि तथा
मदरसा शिक्षकों के लिए पेंशन योजना लागू किए जाने का ऐलान किया जा सकता
है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मायावती के साथ हाल में हुई मुलाकातों के
दौरान शिया और सुन्नी धर्मगुरुओं ने उर्दू अकादमी की बदहाली, मदरसा
शिक्षकों के लिए पेंशन सुविधा और उर्दू फारसी शिक्षा को बढ़ावा देने के
लिए एक विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की मांग की थी। इन धर्मगुरुओं का
कहना था कि आंध्रप्रदेश में उर्दू अकादमी को 12 करोड़ रुपये तथा दिल्ली में
5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में उर्दू अकादमी को महज 30
लाख रुपये सालाना अनुदान दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने मुस्लिम धर्मगुरुओं
को इस विसंगति को दूर करने का आश्वासन दिया था।

अधिकृत सूत्रों ने बताया कि सरकार प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक
उर्दू फारसी विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे सकती
हैं। सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम धर्मगुरुओं से हाल में हुई मुलाकात के
दौरान उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनने के बाद मायावती ने उन्हें मुस्लिम
समुदाय के कल्याण के दीर्घ और लघुकालिक उपायों की सूची सरकार के सामने
रखने का आश्वासन दिया था। मुस्लिम समुदाय को रिझाने के लिए मायावती अपनी
पार्टी के नेताओं के एक विशिष्ट समूह का गठन कर चुकी हैं। इसमें बसपा
महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, प्रदेश के लोकनिर्माण विभाग के मंत्री
नसीमुद्दीन सिद्दीकी और राज्य विधान परिषद के पूर्व सदस्य सिराज मेंहदी को
शामिल करके उनसे मुसलमानों के शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार के क्षेत्रों
में उन्नयन के उपाय सुझाने को कहा गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुसलमानों को रिझाने की कोशिश के
तहत बसपा मुखिया मायावती मुस्लिमों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व दे सकती
हैं और मुसलमानों का दिल जीतने के लिए कुछ मुस्लिम विधायकों को राज्य
मंत्रिपरिषद में भी शामिल किया जा सकता है।

उत्तरप्रदेश में मायावती के 50 सदस्यीय मंत्रिमंडल में इस समय 5
मुस्लिम मंत्री हैं, जबकि 206 सदस्यीय बसपा विधानमंडल दल में 29 मुस्लिम
विधायक हैं।

इस बीच प्रदेश के मुसलमानों के एक गुट में मायावती द्वारा किए जा रहे
प्रयासों का असर नजर आने लगा है। मुख्यमंत्री मायावती से मुलाकात कर चुके
सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद का कहना है कि उत्तरप्रदेश देश का सबसे
बड़ा और सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला राज्य है। उनका कहना है कि हम अमेरिका
के साथ किसी भी समझौते के खिलाफ हैं और एटमी करार का विरोध करने के लिए
मायावती का स्वागत करते हैं।

 

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_4621134/

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