ज्योतिरादित्य सिंधिया और हिन्दू वीकास दर |
ज्योतिरादित्य सिंधिया और हिन्दू वीकास दर |
अभी कुछ दिन पहले हीं ज्योतिरादित्य जी टेलीविज़न पर हिन्दू वीकास दर की रट लगा के बठे थे, आखिर यह वीकास दर है क्या, और आखिर इसकी महत्ता आज इतनी क्यों बढ़ गयी है| कौन कितनी गति से इस धरती का शोषण करता है, क्या यही इस वीकास दर का तात्पर्य है | अच्छी भली उपजाऊ भूमि को वीकास दर के नाम पे SEZ/ MALL में तब्दील कर दिया जाता है |
ऐसा लगता है की ज्योति जी पर पश्चिम ओर अब्रहमिक विचारों का कुछ अधिक हीं प्रभाव हो गया है, यह धरती केवल हमारे उपभोग मात्र का हीं साधन रह गयी है | यह समस्या तो तीनो अब्रहमिक विचारों के साथ है (इस्लाम/ जुडाइसम और क्रिस्त्तनिटी), और इन्ही विचारों से पश्चिम के उदर से पैदा हुए capitalism/ communism भी इस धरती को मात्र उपभोग का साधन मानते हैं | ज्योति जी को हमारे पूर्वजों के विचार, जो की प्रकृति के साथ समरसता बनाने के थे, इस धरती को मां स्वरुप जगत जननी मानने के थे, आज हिन्दू वीकास दर लगने लगे हैं | हिन्दू शब्द ऐसा लगता है की अपमान का परिचायक हो गया है, जो मिटटी हमें जगत जननी लगती है, वह उनको कीचड़ लगती लगती है, क्यों न हो वह तो राजा हैं |
वैसे इसमें उनका अधिक दोष नहीं है, उनके चाचा जवाहर लाल नेहरु जी भी कम नहीं थे, पूर्वी बंगाल की भूमि उन्हें कीचड़ नजर आती थी, लेह और लद्दाख/ सियाचिन उन्हें बंजर भूमि दीखते थे, जहाँ पर घांस का एक भी तिनका नहीं उगता | वह तो कहा भी करते थे गलती से हिन्दू हो गए हैं, विचार तो पुरे पश्चिमी थे|
यदि हम हिन्दू जल्दी नहीं जगे तो यह कपूत हमारी जगत जननी माँ स्वरुप वसुंधरा को बाँझ बनाने की पूरी तय्यारी कर के बठे हैं| ग्लोबल वार्मिंग भी इन्ही कपूतों की देन है और ज्योतिरादित्य जी भी शायद उन कपूतों की जमात में शामिल हैं |
जय राम जी की |
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Comments
Well done Dr Sahab..
Well done Dr Sahab..
KINDLY TELL THIS IDIOT
KINDLY TELL THIS IDIOT FELLOW THAT NATION ALWAYS HAD NEHRU-MAHALANOBIS RATE OF GROWTH. NATION WAS NEVER A HINDU STATE, THEN HOW CAN THERE BE HINDU RATE OF GROWTH ???
Nice post Dr k Prabhakar Rao
Nice post
Dr k Prabhakar Rao