श्री नरेंद्र मोदी की कविता-तस्वीरों के पार
मैं अपनी तस्वीरों में हूँ भी और नहीं भी
मैं अपने पोस्टर में हूँ भी और नहीं भी
इसमें न कोई विरोध
न कोई विरोधाभास
तस्वीर आत्मा जैसी नहीं है
वह तो पानी में भीगती है
आग में जलती है
बह भीगे या जले
मुझे कुछ नहीं होता
आप मुझे मेरी
तस्वीर में या पोस्टर में
खोजने का
मिथ्या प्रयत्न न करें।
मैं तो
निश्चिंत बैठा हूँ
अपने
आत्मविश्वास में-
अपनी वाणी,
व्यवहार और कर्म में
आप मुझे मेरे
कर्मों से जानें
कर्म ही मेरा
जीवन-काव्य है
लयताल है।
घर में
गीतासार
आंगन में
कर्मधार
आप सभी के लिए
अकारण आर्द्र
कोमल प्यार है
आप मुझे
तस्वीर में नहीं
पसीने की
खुशबू में खोजें
योजनाओं के
अम्बार की थकावट में
मेरी आवाज़ की
गूँज पहचानें
मेरी आँखों
में आप ही की छवि है।
(श्री नरेंद्र मोदी की कविता का हिन्दी अनुवाद)
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Comments
Narendra Bhai Apart from all
Narendra Bhai
Apart from all propoganda you are still tal;l
Kauntey Amarendra
modi ji hame hindu ko aur
modi ji hame hindu ko aur aage le jana hai . is liye hum tumhare sath he.aur wese bhi hum mangal pande ke family se he. jay hindutav