THE SHUBHAM's blog

भारत में अमेरिकी कंपनियों का फैलता जाल ...................................क्या हम फिर गुलाम होंगे ????

आदरणीय राष्ट्रप्रेमी भाइयों और बहनों

अभी वालमार्ट का मामला चल रहा था (है) और मैं कई बुद्धिजीवियों के विचार पढ़ रहा था, सुन रहा था, देख रहा था | उसमे कुछ बाते जो समान रूप से मुझे देखने को मिली वो थी कि "बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हमें Quality Products मुहैया कराती हैं", दूसरा कि "चीन में भी तो वालमार्ट है वहाँ कौन सा पहाड़ टूट पड़ा है", आदि आदि | आज मैं इसी विषय पर कुछ तथ्य उन बुद्धिजीवियों के साथ-साथ आम लोगों के समक्ष लाने की कोशिश कर रहा हूँ | इस लेख में कुछ वेबसाइट के लिंक दिए हुए है, ये लिंक इस लेख के अलावा है | ये लेख तीन भागों में है और हमेशा की तरह ये लेख भी परम सम्मानीय राजीव दीक्षित भाई के विभिन्न व्याख्यानों में से जोड़ के मैंने बनाया है, उम्मीद है कि आप लोगों के ये पसंद आएगी |

चीन और विदेशी पूंजी निवेश

भारत में अमेरिकी कंपनियों का फैलता जाल ...................................क्या हम फिर गुलाम होंगे ????

आदरणीय राष्ट्रप्रेमी भाइयों और बहनों

अभी वालमार्ट का मामला चल रहा था (है) और मैं कई बुद्धिजीवियों के विचार पढ़ रहा था, सुन रहा था, देख रहा था | उसमे कुछ बाते जो समान रूप से मुझे देखने को मिली वो थी कि "बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हमें Quality Products मुहैया कराती हैं", दूसरा कि "चीन में भी तो वालमार्ट है वहाँ कौन सा पहाड़ टूट पड़ा है", आदि आदि | आज मैं इसी विषय पर कुछ तथ्य उन बुद्धिजीवियों के साथ-साथ आम लोगों के समक्ष लाने की कोशिश कर रहा हूँ | इस लेख में कुछ वेबसाइट के लिंक दिए हुए है, ये लिंक इस लेख के अलावा है | ये लेख तीन भागों में है और हमेशा की तरह ये लेख भी परम सम्मानीय राजीव दीक्षित भाई के विभिन्न व्याख्यानों में से जोड़ के मैंने बनाया है, उम्मीद है कि आप लोगों के ये पसंद आएगी |

चीन और विदेशी पूंजी निवेश

टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज में मेरा एक हिन्दू के रूप में अनुभव ? क्या ये भारत में पढाया जा रहा है ?

मुंबई आकर ज्यादा अंग्रेजी पड़े लिखे लोगों के बीच आकर पता चला बड़े विश्विद्यालयों के शिक्षक और छात्र ( इनमे ज्यादातर हिन्दू हैं ) कैसा सोचते हैं खासकर के सोशल साइंसेज के आईये जानते हैं :-

१) अंग्रेजी के बिना कुछ नहीं हो सकता अंग्रेजों के बिना कुछ नहीं हो सकता हमें हमेशा इनके आगे सर झुका कर रहना चाहिए क्योंकि ये हमें अंग्रेजी में तकनिकी देते हैं |
२) जो भी भारत की या स्वदेशी या संस्कृति की बात करे उसे सारे लोग मिलकर एक साथ गालियाँ देना शुरू हो जाते हैं, क्योंकि वो भारत को पिछड़ा बनाना चाहता है क्योंकि भारत की सारी संस्कृति और ज्ञान तो पिछड़ा हुआ है |
३) भारत की या हिन्दू धर्म की बुराई करो तो आप बड़े ज्ञानी व्यक्ति समझे जाते हो और आपकी समाज सेवियों( अमीर elite class ) में क़द्र बड जाती है , हो सकता है आपको कोई व्याख्यान करने भी बुला लें |
४) सारी दुनिया खासकर ब्रिटेन और अमेरिका का लिखा हुआ इतिहास ही सही माना जायेगा और तर्क उसी के आधार पर होंगे क्योंकि काले अंग्रेजो के बाद दादाओं ने वो लिखा है और भारत के सभी इतिहासकार मुर्ख है वो हिंदूवादी बेवकूफ हैं |

टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज में मेरा एक हिन्दू के रूप में अनुभव ? क्या ये भारत में पढाया जा रहा है ?

मुंबई आकर ज्यादा अंग्रेजी पड़े लिखे लोगों के बीच आकर पता चला बड़े विश्विद्यालयों के शिक्षक और छात्र ( इनमे ज्यादातर हिन्दू हैं ) कैसा सोचते हैं खासकर के सोशल साइंसेज के आईये जानते हैं :-

१) अंग्रेजी के बिना कुछ नहीं हो सकता अंग्रेजों के बिना कुछ नहीं हो सकता हमें हमेशा इनके आगे सर झुका कर रहना चाहिए क्योंकि ये हमें अंग्रेजी में तकनिकी देते हैं |
२) जो भी भारत की या स्वदेशी या संस्कृति की बात करे उसे सारे लोग मिलकर एक साथ गालियाँ देना शुरू हो जाते हैं, क्योंकि वो भारत को पिछड़ा बनाना चाहता है क्योंकि भारत की सारी संस्कृति और ज्ञान तो पिछड़ा हुआ है |
३) भारत की या हिन्दू धर्म की बुराई करो तो आप बड़े ज्ञानी व्यक्ति समझे जाते हो और आपकी समाज सेवियों( अमीर elite class ) में क़द्र बड जाती है , हो सकता है आपको कोई व्याख्यान करने भी बुला लें |
४) सारी दुनिया खासकर ब्रिटेन और अमेरिका का लिखा हुआ इतिहास ही सही माना जायेगा और तर्क उसी के आधार पर होंगे क्योंकि काले अंग्रेजो के बाद दादाओं ने वो लिखा है और भारत के सभी इतिहासकार मुर्ख है वो हिंदूवादी बेवकूफ हैं |

नेताओं के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पड़ने चाहिए ???

आज भारत में जितने भी बड़े नेता हैं उन सभी के बच्चे या तो विदेशों में पड़ रहे हैं या प्राइवेट स्कूलों में ???? शर्म आनी चाहिए इन सब नेताओं को ?????

गुटखा ITC और शराब पर पाबन्दी लगनी चाहिए इस देश में ?????

काका, बाबा, गुरु क्या है ये सब ???????

हमारे समाज के आदरणीय लोगो के नाम जिन्हें हम सम्मान से देखते हैं ?????

नहीं ये तीनो ही उत्तर भारत में बिकने वाले गुटखे के नाम हैं !! अफ़सोस की बात है जिनकी हम कभी इज्ज़त किया करते थे आज उन्हें गुटखा बना दिया ! वो भी जर्दे का गुटखा जिससे लाखो लोग हर साल कैंसर से मरते हे, ये बहुत ही शर्मनाक है

afsal guru ko fansi??? hahaha

"अफसल गुरु को फंसी इसलिए नहीं होनी चाहिए के उसने संसद भवन पर हमला किया बल्कि इसलिए होनी चाहिए के वो एक भी गद्दार नेता को नहीं मार पाया "

खाने के लिए रोटी की ज़रुरत होती है कंप्यूटर या लैपटॉप की नहीं ?????

खाने के लिए रोटी की ज़रुरत होती है कंप्यूटर या लैपटॉप की नहीं ?????

आप लोग सोच रहे हैं ये क्या पागलपन की बात लिखी है कोई कंप्यूटर कब खाता या खिलाता है !

Parliament Canteen's Menu Card

Parliament Canteen's Menu Card
 

 Can you imagine a vegetarian thali lunch for Rs.12.50 or a katori (small bowl) of dal at Rs.1.50, and chapatis for a rupee each at a time when the prices of essential commodities are touching the sky?

Yes it is possible, even if food is getting out of the reach of the poor in the country. Welcome to the Parliament House canteen - where delectable dishes will never act pricey.

A series of catering units run by Indian Railways at Parliament House, including at the library and the annexe building, serve food at rates which are a good decade old but are hard to digest for a newcomer.