RASHTRA ARADHNA BY CHANAKYA

हम करें राष्ट आराधनातन से मन से धन सेतन मन धन जीवनसेहम करें राष्ट आराधना………………।।…धृ
अन्तर से मुख से कृती सेनिश्र्चल हो निर्मल मति सेश्रध्धा से मस्तक नत सेहम करें राष्ट अभिवादन…………………। १
अपने हंसते शैशव सेअपने खिलते यौवन सेप्रौढता पूर्ण जीवन सेहम करें राष्ट का अर्चन……………………।२
अपने अतीत को पढकरअपना ईतिहास उलटकरअपना भवितव्य समझकरहम करें राष्ट का चिंतन…।………………।३
है
याद हमें युग युग की जलती अनेक घटनायेंजो मां के सेवा पथ पर आई बनकर
विपदायेंहमने अभिषेक किया था जननी का अरिशोणित सेहमने शृंगार किया था माता
का अरिमुंडो से
हमने ही ऊसे दिया था सांस्कृतिक उच्च सिंहासनमां जिस पर
बैठी सुख से करती थी जग का शासनअब काल चक्र की गति से वह टूट गया
सिंहासनअपना तन मन धन देकर हम करें पुन: संस्थापन………………।४

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