DURG
DURING THE ELECTION 2009 VERY UNFORTUNATELY SOME BJP PARTY MEMBERS COST THEIR VOTE AGAINST THEIR CANDIDATE,SPECIALLY DURG VIDHANSABHA THIS IS NOT GOOD FOR THE PARTY.
HEARTIEST CONGRETULATION TO FINALLY ELECTED MP SUSHRI SAROJ PANDEY SHE IS THE FIRST LADY MP FROM DURG
FIRST MAYOR LADY FROM DURG
FIRST MLA FROM VAISHALI NAGAR
FIRST POLITICAL PERSONALITY HAVING THREE POSTS MAYOR-MLA-MP.
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HINDUTV
भारत में तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी लोगों ने जहाँ हिन्दुओं को और हिंदुत्व को हिन्दू आतंकवाद तक का नाम दे दिया है वहीँ ये जानना भी आवश्यक है की “व्हाट इस इंडिया ” मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई की भारतीय दर्शन से दुनिया कितनी प्रभावित है ,इस किताब ने दुनिया भर के महान फिलासफर से लेकर वैज्ञानिकों सहित जानी मानी विश्व प्रसिध्ध हस्तियों की भारतीय संस्कृति कला और जीवन जीने की पध्धति को श्रेष्ठ और अनुकर्णीय माना है ,उन सभी के विचारों को एक ही किताब में संकलित कर सलिल जी, जो शिलोंग मेघालय के निवासी हैं, ने एक ऐसा महान कार्य किया है जिसके माध्यम से आज के तथाकथित प्रगतिशील और आधुनिक माने जाने वाले लोगों की आँखें खुलेंगी ,हिन्दू को या हिंदुत्व को उग्र कहने वालों को समझ लेना चाहिए की वास्तव में ये निर्विवाद सत्य है की इस देश के वेद-पुराण ने मनुष्य को दया ,अहिंसा,मानवता प्रेम,शील,शान्ति,करुणा,समता एवं बंधुत्व का मार्ग बता कर सम्पूर्ण विश्व को आलोकित किया है,यही तो वो देश है जिसमे सारे जीव जन्तुं ,पशु पक्षी ,नदी पहाड़ों ,तक को देवतुल्य स्थान दिया और निभाया भी है ,समाज में आज भी इन मूल्यों का कोई तोड़ नहीं है ,समता,बंधुता,नैतिकता की स्वास्थ्य परंपरा हमारे रग रग में निहित है ,युवा पीढ़ी अपनी राह से भटक कर पश्चिम से भौतिकता की और आकर्षित हो रही है ,जीवन मूल्यों और आवश्यकताओं की परिभाषा बदल रही है ,ऐसे में ये किताब एक नसीहत समझें या चेतावनी किन्तु सत्य तो सत्य ही है इसी लिए क्योन फ्रेद्रिका जी ने कहा है की “आप भारतीय भाग्यशाली हैं जिनको ज्ञान विरासत में मिला ,मुझे आपसे ईष्र्या है ,ग्रीस मेरा देश है किन्तु मेरा आदर्श भारत है “निश्चित ही उक्त महान फिलासफर ने समझाने में कोई कसार नहीं रखी समझाना हमारा काम है,जर्मनी के फिलासफर आर्थर जी का ये कोटेसन की “सारी दुनिया की शिक्षा मानवता के लिए उपनिषद् से ज्यादा मददगार नहीं है ” इतना विश्वास उपनिषद् के प्रती दिखाया और माना गया है ,इसे आप क्या कहेंगें की जिस देश के उपनिषद् दुनिया भर में ग्राह्य है वहां के कर्णधारों ने शिक्षा के अन्य मापदंड तय कर लिए हैं ,या हम ये कह सकते हैं की हम भटक रहें हैं ,वेलन्ताइन डे धीरे धीरे हमारी जीवनशैली बन रहा है ,अंग्रेजी स्टाइल की वो संस्कृति जिससे खुद अंग्रेज ऊब रहें हैं हम उसे नवीनता मान कर अंधानुसरण कर रहें हैं ,एक ग्रीक लेखक महोदय ने लिखा है की दुनिया की कोई भाषा संस्कृत से ज्यादा सरल स्पष्ट नहीं हैं ,ये ग्रीक लेखक कह सकतें हैं हमारे यहाँ यदि कहा जाएगा तो उसे धर्म निरपेक्षता की दुहाई देकर चुप कर दिया जावेगा .
ये सच है भारतीय इतिहास आक्रमणकारियों -आक्रान्ताओं का शिकार रहा है ,सात पीढ़ियों के मुस्लिम शाशन के बाद २०० वर्षों तक हमने अंग्रेजों की गुलामी भी सही ,देश आज़ाद हुवा किन्तु जिम्मेदार लोग कहें या नीति निर्धारक कहें या शासन करने वाले लोग कहें किसी ने भी इन मूल्यों के प्रति अपनी सही और प्रगट आस्था नहीं जताई, केवल वोट के लिए एक नया सिधांत बना दिया गया “धर्मनिरपेक्षता” इस शब्द को विकृत रूप में प्रयोग किया जाने लगा केवल वोट प्राप्त करने तथा एक वर्ग विशेष को प्रभावित करने के प्रयास में हमने तुष्टिकरण मात्र किया जब की दुनिया मानती है की अँधेरे में यदि कोई रह दिखा सकेगा तो केवल भारतमाता की कोख से उपजी “श्रीमद भागवत” गीता का ज्ञान जिसने अन्याय को सहन करना भी अन्याय माना है ,विलिअम बटलर जी ने भी इसे श्रेष्ठ फिलासफी माना है ,भारतमाता की गोद में बहने वाली नदियाँ गंगा -गोमती भी केवल जल प्रवाह करने वाली नदिया ही नहीं अपनी परम विशेषताओं के कारण इन्हें देव तुल्य दर्जा प्राप्त है ,इस किताब के लेखक सलिल जी साधुवाद के पात्र हैं ,मेरी अपनी राय है की “व्हाट इस इंडिया” को देश की संसद -विधान सभाओं सहित सभी स्कूल कालेजों में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना चाहिए ताकि आने वाली नस्ल को हम देश की वास्तविक और स्थापित मान्यताओं के साथ जोड़ सकें.
आधुनिक विज्ञान भारतीय वेद पुराण और उपनिषदों से ऊपर नहीं है ,बहुजन हिताय -बहुजन सुखाय के आधारबिन्दु हमारे प्राचीन साहित्य हैं ,श्री बर्नार्ड शाह जी का स्पष्ट मत है की “दुनिया में सबसे ज्यादा सहनशील यदि कोई धर्मपंथ है तो केवल हिंदुत्व है ” हिन्दुइजम सत्य के मार्ग को बताने वाला और सही राह पर चलनेवाला धर्म हिन्दू है जो ईश्वर की बताई राह की और मानवता को अग्रसर करता है ,श्री बी एस नाल्पौल जी के मतानुसार “हिन्दू पंथ सामान्य मनुष्य के लिए अनुकरणीय है ” जड़ता -दासता से मुक्ति केवल हम दिला सकते हैं ,जहाँ महान विचारकों ने इस प्रकार आस्था प्रगट की है वहीँ यथार्थ में आज की दशा और दिशा जिस पर हम चल रहें हैं वो निश्चित ही भटकाव कहा या देखा जा सकता है इसलिए भी मेरा ये स्पष्ट मत है की व्हाट इज इंडिया के लेखक सलिल जी ने इस किताब को लिख कर विश्व की हमारे प्रति सोच वो भी वास्तविक सोच को उजागर किया है इस किताब को एक अमूल्य धरोहर का दर्ज़ा दिया जा सकता है .
देश की स्कूल कालेज यदि थोडा सा भी प्रयास अपनी संस्कृति अपने वेद की बात करेंगें तो तथाकथित धर्मनिरपेक्षता वादी चोलेधारी लोग इसे भगवाकरण का नाम देने लग जातें हैं ,यदि योग की बात की जावेगी तो इसे एक हिन्दू एजंडा मान कर विरोध शुरू कर दिया जाएगा ,इसे विडम्बना ही नहीं देश का दुर्भाग्य ही कहा जावेगा की हमारे ज्ञान का लोहा दुनिया मानती है किन्तु हम इससे भाग रहें है ,सनातन धर्म की शास्वत और सर्वमान्य परम्पराओं से दुनिया लाभान्वित हो रही है ,इसके गुण गान कर रही है और हम “धर्मनिरपेक्षता” के ढोल अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए बजा रहें हैं ,ये सब अब ज्यादा समय तक नहीं चलेगा क्योन की ये साबित हो चुका है की “अति का अंत” सुनिश्चित है ,दुनिया ने माना अब सबको मानना होगा की शिक्षा हो या चिकित्सा ,ज्ञान हो या विज्ञान ,अर्थ हो या व्यापार ,संस्कार हों या परम्पराएँ भारतीय वेद पुराणों के मानक सिधांत सर्वोपरी थे हैं और सदा रहेंगें ,इस विषय में लिखने -जानने -कहने और सुनाने सुनने के लिए बहुत कुछ है ,किन्तु फ़िलहाल माननीय सलिल जी को कोटिशः बधाई .
LOCAL BJP MEMBERS MUST THINK
LOCAL BJP MEMBERS MUST THINK DEEPLY
DO DEEPLY AND WATCH DEEPLY DURG VIDHAN SABHA.
BADHAI TO SUSHRI SAROJ
BADHAI TO SUSHRI SAROJ PANDEY