जो गलत है वो गलत है - There is no doubt in it
1 .अफजल गुरू देशभक्त है, भगत सिंह व
साध्वी आतंकवादी है।
मुझे लगता है की जो ये कहता है की अफजल गुरु या
कसाब या फिर और भी कोई आतंकवादी
देशभक्त है तो फिर ऐसे
लोगों का भी जल्द से जल्द हिन्दुस्तान से सफाया कर देना चाहिए.निर्दोषों
को मारने वाला कभी भी देशभक्त नहीं हो सकता और जो इन दरिंदों का पक्ष लेता
है उसे भी वही सज़ा मिलनी चाहिए जो ये deserve करते हैं.अब सवाल यहाँ ये
पैदा होता है की इन्हें सज़ा क्या दी जाए ? तो इसके जवाब में एक बार मैंने
अपनी orkut की id पर भी लिखा था की -
"कसाब और
अफजल गुरु जैसे कुत्ते
जो की निर्दोष लोगों को मारते हैं, इन्हें फांसी जैसी आसान मौत नहीं
बल्कि पूरे world के सामने गोली से उड़ा देना चाहिए ताकि पूरे world को और
इन कमीने आंतकवादियों को भी पता चल जाए की भारत पर आँख उठाने वालों का
क्या हाल होगा, इन कुत्तों को भी तो पता चले की गोली लगने पर कितना दर्द
होता है ."
कसाब या फिर और भी कोई आतंकवादी
अब शहीद-ए-आज़म भगत
सिंह जी
पर आते हैं .मैं सबको ये बात बताना चाहता हूँ की हमारे स्वंत्रता संग्राम
का एक भी क्रांतिकारी आतंकवादी नहीं था .आतंकवादी तो निर्दोष,बेक़सूर
लोगों का खून बहाकर उनमें दहशत पैदा करते हैं और ये कमीने तो महिलाओं और
बच्चों तक को नहीं छोड़ते . लेकिन इतिहास गवाह है की हमारे एक भी
क्रांतिकारी ने कभी भी बच्चों और महिलायों को कुछ नहीं कहा .बल्कि एक बार
एक इस प्रकार की घटना घटी थी की अशफाकुल्ला खान साहब,चंद्रशेखर आज़ाद जी और
उनके कुछ अन्य साथी एक सेठ के घर में से कुछ धन लेने के लिए घुसे थे,उस
दौरान जब वे धन इकठा कर रहे थे तो अचानक घर की एक महिला ने चंद्रशेखर जी
पर हमला कर दिया,उसने उनसे उनकी पिस्तोल छिनने की कोशिश की और साथ ही
उन्हें अपने हाथों से मारा भी .चंद्रशेखर चाहते तो बड़े आराम से उस महिला
को गोली मार सकते थे या फिर उसे उसकी हरकतों का करारा जवाब दे सकते थे
लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया क्योंकि किसी भी महिला पर हाथ उठाना
उन्हें मंजूर नहीं था..वे बस अपनी आत्मरक्षा के प्रयास में लगे रहे .हमारे
क्रांतिकारियों
को
आतंकवादी कहने वाले लोग क्या संसार में एक भी ऐसा उदहारण दिखा सकते हैं
जिसमें उन्होंने किसी भी अंग्रेज़ महिला या किसी अंग्रेज़ बच्चे को मारा
हो. अरे हमारे क्रांतिकारी औरों की तरह माफ़ी की भीख नहीं मांगते थे
.शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी,राजगुरु और सुखदेव हंसते-२ फांसी के फंदे को गले
से लगा गए,चंद्रशेखर आज़ाद हमेशा आज़ाद रहे मरते दम तक भी ,इसी तरह की गौरव
गाथाओं से भरा हुआ है उन सबका जीवन . हमें गर्व है इन सब शहीदों और वीरों
पर जिन्होंने अपनी जवानी को भारत माता के स्वाभिमान में अर्पित कर दिया
.बस एक बात कहना चाहूंगा की जो काँटों भरा रास्ता हमारे क्रांतिकारियों ने
चुना उसकी वजह से इनके परिवारों को बहुत कष्ट उठाने पड़े .मेरी खुद की
आँखों में आसूं आ गए थे जब मैंने च्नाद्रशेखर आज़ाद की जीवनी को पढ़ा जिसमें
बताया गया था की आजादी की जंग में कूदने के कारण वे अपनी मां को ज्यादा
समय नहीं दे पाए.वो बेचारी अकेली पागलों की तरह कई-2 महीनो तक उनका
इंतज़ार करती और क्योंकि आज़ाद जी को पेडे बहुत पसंद थे तो हर समय घर में
पेडे लाये रखती .आज़ाद जी आते भी तो कई-२ महीनो में आते और फिर हवा के
झोंकों की तरह 15 -20 min . में ही चले जाते .सच में बहुत ही मार्मिक वर्णन
किया गया है उस सारी स्तिथि का की पढने वाले की आँखों में आँसूं आ जाते
हैं .
अब बात करते हैं साध्वी प्रज्ञा की
.मुझे लगता है की साध्वी प्रज्ञा ने जो किया है उसकी भरपाई हम वर्षों में
भी करना चाहें तो भी नहीं कर सकते .अब तक हम सभी हिन्दू ये गर्व से कहते
थे की -
"every muslim is not a terrorist but every
terrorist is a muslim "
मतलब की ये ठीक है की हर
मुसलमान आतंकवादी नहीं है लेकिन ये भी सच है की जो भी आतंकवादी हैं वे
सारे मुस्लिम हैं .
लेकिन साध्वी प्रज्ञा और उनके साथियों ने एक ऐसा
कृत्य किया है जिससे की हिंदुत्व पर भी आतंकवाद का दाग लग गया है .अब हम
कभी भी गर्व के साथ और पूरे जोश से वो ऊपर वाली line नहीं कह सकते.साध्वी
प्रज्ञा और उनके साथियों का कहना है की वे इन मुस्लिम आतंकवादियों और
groups को दिखाना चाहते थे की हम भी कुछ कम नहीं हैं,वे अगर हमारे
हिन्दुओं को मारते हैं बम धमाके करके तो हम भी वैसा ही करेंगे .म
तलब वे हमारे बेक़सूर और
निर्दोष लोगों को मारें तो हमें भी उनके निर्दोष और बेक़सूर लोगों को मार
देना चाहिए ?अरे तुम्हे अगर बम धमाके बदला लेने के लिए करने ही थे तो पहले इन
सिमी,इंडियन मुजाहिद्दीन ,लश्कर-ए-तैयेबा आदि का ठिकाना पता लगाकर वहां पर
करते और फिर देखते की कैसा पूरा देश तुम्हारे साथ खड़ा होता है लेकिन
तुमने भी निर्दोष बच्चों,महिलायों आदि की बस्ती को चुना . मेरा शुरू से
इसी सोच वाले लोगों के साथ विरोध रहा है की जो गलत करे उसे मारना चाहिए या
फिर जो उसकी जाती और मज़हब का है उसे मारना चाहिए चाहे उसका मामले से कुछ
लेना-देना हो या नहीं .हर वो व्यक्ति जो की निर्दोष इंसानों को मारता है
वो आतंकवादी है और इसी कारण साध्वी प्रज्ञा भी आतंकवादी है .और जो कलंक
साध्वी और उसके साथियों ने हिन्दुओं को माथे पर लगाया है उसे मिटाना अब
अत्यधिक कठिन प्रतीत होता है.जब कुछ मुसलमान अफजल गुरु या अन्य
आतंकवादियों का पक्ष लेते हैं तो हम सभी हिन्दू भाइयों को बहुत दुःख होता
है ,हमें वो लोग देश के दुश्मनों का साथ देते हुए लगते हैं और हम सभी
गुस्से में भर उठते हैं लेकिन मेरे भाइयों अगर आप मुस्लिम भाइयों से ये
उम्मीद रखना चाहते हैं की वे इन देश के दुश्मनों और गद्दारों का समर्थन न
करें तो मेरी आप से भी प्रार्थना है की आप लोग भी साध्वी प्रज्ञा जैसे
लोगों का समर्थन न करें .जैसे हमें दुःख होता है वैसे ही उन्हें भी दुःख
होता है .हम क्यों ऐसे गलत लोगों का मजहब देखकर अपना फैसला लें ,क्यों
नहीं ऐसे लोगों को इंसान के रूप में शैतान के तौर पर देखा जाए और वो चाहे
किसी भी धर्म का क्यों न हो उन्हें मृत्युदंड दिया जाए जिससे और लोगों के
लिए एक example set हो .क्यों हम चीज़ों को neutral होकर नहीं देखते ?
क्यों हम हिन्दू,मुस्लिम,सिख ,इसाई आदि के रूप में ना देखकर ऐसे मामलों को
एक हिन्दुस्तानी के रूप में देखते ? हम हिन्दू,मुस्लिम,सिख,इसाई अपने-२
घरों में हैं लेकिन अपने घरों से बाहर हम सभी भारतीय हैं.
2 .सिमी, इंडियन मुजाइद्दीन समाज सेवा में लगे
संगठन है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विष्व हिन्दू परिषद आतंकवादी
संगठन है।
सिमी, इंडियन
मुजाइद्दीन जैसे संगठन समाज की सेवा में नहीं बल्कि समाज
के खात्मे में लगे हुए
हैं .ऐसे संगठनों का जितनी जल्दी हमारे हिन्दुस्तान से सफाया होगा उतनी
ही जल्दी हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच में एक दुसरे के प्रति जो
ग़लतफ़हमियाँ हैं वो दूर होंगी .
राष्ट्रीय स्वयंसेवक
संघ ( RSS ) के ऊपर कोई प्रश्नचिंह नहीं लगा सकता .वो हर घडी राष्ट्र की
सेवा के प्रति समर्पित संगठन है और देश के लिए किये गए सेवा कार्यों में
उसका योगदान अभूतपूर्व है. पूरे देश में एक राष्ट्रवाद की लहर लाने में
उसका मुख्या योगदान है . RSS किसी भी संप्रदाय या मजहब के विरोध में नहीं
है बल्कि वो आपकी और मेरी तरह सिर्फ राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ है
.यहाँ तक की जब राज ठाकरे ने जब देश की एकता और अखंडता को नुक्सान पहुचाने
की कोशिश की तो संघ ने उसका भी विरोध किया .
जहाँ तक बात है विश्व
हिन्दू परिषद् ( VHP )की तो वो भी एक राष्ट्रहित की भावना वाला संगठन है
लेकिन उसके ज़्यादातर members के बोलने की जो भाषा होती है वो एक धर्म
विशेष के खिलाफ और एक धर्म विशेष के पक्ष में होती है जिससे की दोनों
धर्मों के बीच में दूरियां बढती हैं .अगर वो थोडा सा अपनी जुबान पर
control कर लें तो यकीनन उनके प्रति ये उत्पन होने वाला संदेह भी ख़त्म हो
जाएगा .
3 .
गोधरा-कांड एक दुघर्टना है, गुजरात दंगे सुनियोजित हैं।
बिलकुल नहीं
,गोधरा-काण्ड एक सोची समझी साजिश है और गुजरात दंगे उसकी प्रतिक्रिया में
उत्पन हुआ उसका परिणाम है. मैं पहले भी कह चूका हूँ की अगर किसी और से भी
क्रिया होगी तो दूसरी और से प्रतिक्रिया ज़रूर होगी और वो ज़रूरी भी है
.लेकिन उस प्रतिक्रिया में ये ध्यान रखा जाए की कोई निर्दोष या मासूम
व्यक्ति उसका शिकार न हो जाए,जो दोषी है उसका अंत करने में किसी को कभी
नहीं हिचकिचाना चाहिए.गुजरात में जो हुआ उसे पूरी तरह से सही तो नहीं
ठहराया जा सकता क्योंकि उसमें दोषियों के साथ-२ बहुत से निर्दोष भी मारे
गए लेकिन वो क्यों हुआ हमें पहले वो देखना चाहिए.शुरुआत पहले किसने की ये
देखना अति-आवश्यक है .
4
. मुसलमानों के लिए आरक्षण, हिन्दुओं के लिए धमाके।
आरक्षण तो हर किसी के
लिए गलत है फिर चाहे वो मुसलमानों के लिए दिया जाए या फिर दलितों आदि के
लिए .हमें लोगों को योग्य और अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बनाना चाहिए
ना की आरक्षण के रूप में उन्हें ये भीख देकर जो योग्य और काबिल लोग हैं
उनका हक मारा जाए. अगर हर व्यक्ति को समान मौके उपलब्ध करायें जाएँ तो इस
आरक्षण की क्या अव्शयाकता है
? अगर आरक्षण करना ही
है तो वो आर्थिक दशा पर आधारित होना चाहिए ना की मजहबी और जातिगत आधार पर.
जो भी व्यक्ति गरीब है चाहे वो मुस्लिम है,दलित है या अन्य किसी भी जाती
का है,उसे अच्छी शिक्षा प्राप्त कराई जाए और उसके बाद तो पढ़ाई में जो
जितनी मेहनत करेगा फिर उसे उसका वैसा ही सुखद परिणाम भी मिलेगा . लेकिन
दुःख की बात है की ऐसा होने की बजाये जो अयोग्य लोग हैं ,undeserving
candidates हैं उन्हें deserving candidates की जगह पे लेना पड़ता है इस
आरक्षण की व्यवस्था की वजह से .और इतिहास गवाह है की इस आरक्षण की
व्यवस्था की वजह से आज तक किसी भी धर्म का या जाती का कुछ भला नहीं हुआ
बल्कि इनमें जो पहले से ही साधन संपन्न लोग हैं वही इस गलत व्यवस्था की
वजह से खुद को ही और आगे ले जाते हैं और जिनके लिए ये व्यवस्था की गयी है
उन्हें इसका 1 प्रतिशत भी लाभ नहीं होता . इसलिए मैं फिर से कहता हूँ की
ये आरक्षण धर्म या जाती के आधार पर न होकर आर्थिक आधार पर किया जाए जिससे
की जिन्हें इसकी वास्तव में आवश्यकता है उन तक इसका लाभ पहुंचे .
5 .बाबरी ढ़ांचे का गिराया जाना एक मुद्दा है,
सैकड़ौं हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करना विकास कार्य है।
मुझे लगता है की
बाबरी मस्जिद वाली घटना आपस में एक सही संवाद की कमी की वजह से हुई .जो
हुआ वो सही नहीं हुआ लेकिन भगवान् राम की जन्म-भूमि अयोध्या में एक भव्य
राम मंदिर का निर्माण किया जाए,इस मांग में कुछ भी गलत नहीं है . मुझे समझ
नहीं आता की इस सही मांग के बावजूद वहां पर ऐसी स्तिथि क्यों बनी की अंत
में ये सब हुआ .थोडा हमारे मुस्लिम भाईयों को भी समझना चाहिए की उस समय
बिना किसी रोक-टोक ,बिना किसी वाद-विवाद के अगर वे आराम से उस जगहाँ पर
राम मंदिर का निर्माण होने देते तो आज हर हिन्दू के दिल में उनके लिए एक
अत्यधिक सम्मान का भाव होता और हिन्दू खुद उनके लिए जगह-२ मस्जिदों का
निर्माण करते क्योंकि राम सिर्फ हिन्दुओं के ही नहीं हैं.वे हर उस व्यक्ति
के लिए आदर्श हैं जो अपना जीवन मर्यादा और संस्कारों के साथ जीने में
यकीन रखता है..इससे देश में एक बहुत अच्छा माहोल पैदा हो सकता था लेकिन
उन्होंने वो मौका गँवा दिया .और एक अच्छी शुरुआत करने की बजाये उस जगहां
पर एक ढांचा खड़ा कर देना और फिर सभी हिन्दुओं को challenge करना,उन्हें
लड़ाई के लिए उकसाना इसे बिलकुल भी सही नहीं ठहराया जा सकता .
और जहाँ तक बात है
सैकड़ों हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करने की तो इसके लिए मैं नरेन्द्र मोदी
जी को बधाई देना चाहूंगा की उन्होंने बिना हिन्दू या मुस्लिम का भेद-भाव
किये बिना गलत तरीके से बने हुए हिन्दू मंदिरों को भी तोडा .जो भी चीज़
हमारे राज्य के या फिर वतन की उन्नति में बाधा बने उसे हमें बिलकुल
बर्दाश नहीं करना चाहिए .
6 .हिन्दुओं को नियमों का पालन करना चाहिए, मुसलमानों के लिए कोई
नियम नहीं।

नियम सबके लिए समान
होने चाहियें .मैं तो खुद इस चीज़ के खिलाफ हूँ के इस देश में हिन्दुओं के
लिए अलग कानून है और मुसलमानों के लिए अलग.ये बिलकुल गलत है.हम सब भारतीय
हैं और सबके लिए एक कानून होना चाहिए. कोई 4 -4 शादियाँ कर लेता है,कोई
दहेज़ में लाखों पैसे मांग लेता है,कोई कहता है की हम तो शरियत के अनुसार
अपना फैसला करेंगे आदि आदि ,ये सब क्या है ? पूरे देश में कानून को एक
मज़ाक बना के रखा हुआ है .इस देश के हर नागरिक पर चाहे वो हिन्दू हो या
मुसलमान एक ही कानून apply होना चाहिए -भारत का कानून. ना की हिन्दू law
और मुस्लिम law आदि आदि .
7 .अल्लाह परमेश्वर है, राम एक काल्पनिक पात्र
है।
मेरा मानना है की हम
चाहे कितने ही अलग-२
भगवानो की पूजा क्यों ना कर लें लेकिन वो परमपिता परमात्मा एक है. ये
अपनी-२ इच्छा है की हम उसे किस रूप में पूजना चाहें .
और मैं इस बात से
सहमत नहीं हूँ की राम एक काल्पनिक पात्र हैं . अगर राम काल्पनिक पात्र
हैं,रामायण काल्पनिक ग्रन्थ है तो क्या आज अयोध्या कहे जाने वाली भूमि भी
काल्पनिक है ?,क्या वो पुल जो ना जाने कितने सैकड़ों वर्षों से बना हुआ है
(जिसे की आज भी राम-सेतु के रूप में देखा जा सकता है ) भी काल्पनिक है ?,
क्या आज श्रीलंका के रूप में जाना जाने वाला देश भी काल्पनिक है ? क्या इन
सब चीज़ों का आज अस्तित्व नहीं है ?
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