हिन्दुओं के लिये सही मार्ग !
आज हिन्दू अगर कमज़ोर है तो इसलिये नहीं कि अन्य मतावलम्बी ताकतवर हैं या धनी हैं । हिन्दू कि कमज़ोरी का एक मात्र कारण उसकी हिन्दू धर्म के बारे में अल्पज्ञता है । अगर हिन्दू अपना कल्याण चाह्ते हैं तो उन्हें अपनी ताकत को अन्य मतावल्म्बियों से घृणा करने अथवा वैमनस्य मोल लेने में खर्च नहीं करनी चाहिये । बेह्तर होगा कि वे अपना समय और ताकत हिन्दू धर्म को समझने और आचरण में लाने के लिये उपयोग करें । कहना न होगा कि इस मार्ग मै कई तरह कि समस्यायें हैं । सर्व प्रथम तो यही है कि हमारी अपनी शिक्षा प्रणाली ने ही इसका मखौल उड़ा रखा है । स्कूली पाठ्यक्रम पूरा कर जो विद्यार्थी निकलते हैं उनके मन - बुद्धी में यह बात बैठ चुकी होती है कि हिन्दू धर्म मिथ्या (Mythology) है व अन्य पढ़ाई कि सामग्री जैसे कि भोतिक विज्ञान, रसायनिक विज्ञान आदि सब सत्य है । वास्तविक परिस्थिति बिल्कुल विपरीत है - भोतिक विज्ञान, रसायनिक विज्ञान आदि सब असत्य है और हिन्दू धर्म अक्षरश: सत्य है । यहां तक कि सत, त्रेता, द्वापरादि युगों क वर्णन बिल्कुल सही है ! पुराणादि जो प्रतीति में भिन्न - भिन्न मतों का वर्णन करते हैं वास्तव में बिल्कुल अविरोधी हैं !! किन्तु इस वास्तविकता का आभास अत्यन्त गहरे अध्ययन के बाद ही होता है । इस तरह का आभास होने पर अन्य मतावलम्बियों से घृणा नहीं रह्ती बल्कि उनके अज्ञान पर दया आती है । भारत में हिन्दू धर्म का पुनुरुत्थान आवश्यक तो है ही पर यह तभी हो सकता है जब हिन्दू स्वयं सजग हों ; साथ ही कट्टरपन से बचैं और हिन्दुओं के पक्ष कि सरकार बने ताकि इस घृणित शिक्षा पद्धति को बदला जा सके । इसी में हिन्दुओं कि तथा अन्य मतावलम्बियों कि भलाई है ।
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