जस्वंत सिंह: पर-धर्म ने डुबोया ।

कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन युद्ध छोड़ कर भिक्षू बनने का विकल्प स्वीकार करने को तैयार हैं ।
तब श्रीकृष्ण स्वधर्म व परधर्म का भेद बता कर कह्ते हैं:- "हे अर्जुन, तू क्षत्रीय है और इसलिये युद्ध तेरे लिये स्वधर्म है । "
भिक्षा मांगना भिक्षू के लिये स्वधर्म हो सकता है पर क्षत्रीय के लिये वह परधर्म ही है ।
श्रीकृष्ण फिर कह्ते हैं कि मनुष्य के लिये स्वधर्म क पालन ही उचित है चाहे उसका वह स्वधर्म अन्य धर्मॊं कि अपेक्षा नीचा हो । परधर्म का पालन करने से मनुष्य का पतन हो जाता है भले ही वह उसके स्बधर्म से श्रेष्ठ हो ।
कहना न होगा कि जिन्ना वह व्यक्तितव है जो केवल पाकिस्तानियों में पूज्यनीय हो सकता है । किसी भारतीय को उसका यशगान शोभा नहीं देता । और जो शोभनीय नहीं है उसे मन, कर्म और वचन में धारण करना उचित नहीं । जिन्ना की प्रशंसा भारतीयों के लिये निश्‍चित रूप से परधर्म है और पाकिस्तानियों के लिये स्वधर्म ।
बुद्धीमान को इतने में ही समझ लेना चाहिये कि जस्वंत सिंह की दशा के लिये कौन जिम्मेवार है ।
होना तो यह चाहिये था कि मुसल्मानों को हम समझाते के इस्लाम उनके लिये परधर्म है और हिन्दूधर्म स्वधर्म पर करा जा रहा है जिन्ना का यशगान । मेरे विचार से गान्धी-नेहरू से सहमति हो या न हो पर जिन्ना का यशगान भारतीयों के लिये सदैव निन्दनीय रहेगा ।

bapi's picture

Jaswant Singhji is a great

Jaswant Singhji is a great leader but i do not know why he is very interested to publish the very shameful and controversial issue in our nation.He must go to Pakistan to praise Jinnah. Or It may happen Jaswant singhji attackedJ by Jinnah's ghost.

Vande Mataram,
JAI BHARATMATA
JAI HINDUSTAN

Thank You,
BAPI